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पटना में गैस संकट: आम आदमी की थाली महंगी और सीमित, होटल-ढाबे प्रभावित

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पटना। ईरान-इज़राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की अफवाहों ने अब सीधे बिहार की राजधानी पटना में आम जनता की थाली पर असर डालना शुरू कर दिया है। विशेषकर कॉमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडरों की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने छोटे और बड़े दोनों तरह के भोजनालयों, ढाबों, मिठाई दुकानों और ठेलों की रोजमर्रा की दिनचर्या प्रभावित कर दी है। शहर के विभिन्न हिस्सों में होटल और ढाबा संचालक गैस की कम उपलब्धता और महंगी कीमतों के कारण मेन्यू में कटौती करने को मजबूर हो रहे हैं। इसके चलते सस्ता और रोजमर्रा का भोजन भी धीरे-धीरे आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।

महंगाई का असर खाने-पीने की वस्तुओं पर

पटना के खाद्य बाजार में महंगाई का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। पहले ₹5 में मिलने वाली रोटी अब ₹7 प्रति पीस बिक रही है। सादा भोजन की थाली की कीमत ₹60 से बढ़कर ₹70 हो गई है। समोसा, ब्रेड पकोड़ा और आलू-प्याज पकोड़े जैसी चीजों की कीमतों में भी उछाल देखा गया है। उदाहरण के लिए, समोसा ₹12 से ₹15, ब्रेड पकोड़ा ₹12 से ₹15 और आलू-प्याज पकोड़े ₹15 में दो पीस से बढ़कर ₹20 में दो पीस हो गए हैं। फास्ट फूड में चाउमीन ₹80 से ₹90 और डबल अंडा रोल ₹45 से ₹50 का हो गया है। चाय की कीमत कई जगहों पर ₹10 से बढ़कर ₹12 हो गई है।
कुछ दुकानदार गैस के बजाय कोयले के चूल्हे का इस्तेमाल कर पुराने दाम बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उत्पादन धीमा होने के कारण ग्राहक अभी भी महंगी कीमत चुका रहे हैं।

हाई कोर्ट कैंटीन में भी प्रभाव

स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि पटना हाई कोर्ट की कैंटीन में भी गैस की कमी का असर दिखने लगा है। हाई कोर्ट की कैंटीन में बिकने वाली कुल्हड़ चाय की कीमत दस रुपये से बढ़ाकर 12 रुपये कर दी गई है। इस बढ़ी हुई कीमत को लेकर चाय दुकानदारों और वकीलों के बीच बहस भी हुई। एक चाय दुकानदार ने कहा, “गैस मिल नहीं रही है। ब्लैक मार्केट में अधिक दाम देकर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। ऐसे में पुराने दाम पर चाय बेचना संभव नहीं है, इसलिए 2 रुपये बढ़ाने पड़े।” वहीं, चाय पीने वालों का कहना है कि गैस का बहाना बनाकर दाम बढ़ाए गए हैं और गैस मिलने के बाद भी कीमतें कम नहीं होंगी।

मिठाई और बेकरी व्यवसाय प्रभावित

पटना की प्रतिष्ठित मिठाई और बेकरी फ्रेंचाइजी “मौंगनीज” ने गैस की कमी के कारण अपने बेकरी प्रोडक्ट पूरी तरह बंद कर दिए हैं। दुकान पर नोटिस लगाकर ग्राहकों से माफी मांगी गई है। अब यहां सैंडविच, समोसा और अन्य बेकरी आइटम उपलब्ध नहीं हैं। अन्य कई दुकानों ने भी समोसा और बेकरी आइटम बनाना बंद कर दिया है।

होटल और ढाबों पर असर

बोरिंग रोड इलाके के होटल संचालक राजू वर्मा का कहना है कि गैस सिलेंडर न तो आसानी से मिल रहे हैं और न ही सस्ती कीमत पर उपलब्ध हैं। इसके कारण उन्होंने मेन्यू से पनीर चिल्ली, मंचूरियन, चिकन चिल्ली और पराठा जैसे व्यंजन हटा दिए हैं। फिलहाल होटल में सादा थाली, चाउमीन और एग रोल जैसी सीमित आइटम ही उपलब्ध हैं। इंडक्शन चूल्हे का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन इससे खाना बनाने में अधिक समय लग रहा है और उत्पादन कम हो रहा है।
मंदिरी क्षेत्र के ठेला संचालक छोटू कुमार बताते हैं कि गैस की कमी के कारण उन्हें कई बार दुकान बंद करनी पड़ती है। कभी-कभी रिश्तेदारों से सिलेंडर लेकर काम चलाना पड़ता है और कभी घरेलू सिलेंडर महंगे दाम पर खरीदना पड़ता है। रिफाइंड तेल की बढ़ी कीमत ने लागत और बढ़ा दी है, जिससे पकोड़े और ब्रेड पकोड़े के दाम बढ़ाने पड़े हैं।
किदवईपुरी के डिंग डोंग होटल के संचालक सुरेश प्रसाद ने बताया कि अब वे कोयले के चूल्हे पर खाना बना रहे हैं। रोटी की कीमत ₹2 प्रति पीस बढ़ानी पड़ी है और थाली ₹70 की कर दी गई है। गैस की कमी के कारण पराठा, सत्तू और कुछ अन्य आइटम फिलहाल बंद कर दिए गए हैं।
आम जनता पर असर

पटना में एलपीजी संकट ने खाद्य बाजार को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। छोटे और बड़े सभी व्यवसायी इस समस्या से जूझ रहे हैं। महंगाई का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। थाली और स्नैक्स की बढ़ी कीमतें आम लोगों के लिए रोजमर्रा का खाना महंगा बना रही हैं।

लोगों का कहना है कि एक बार बढ़ी कीमतें जल्दी कम नहीं होंगी। कई ग्राहक चिंतित हैं कि जैसे ही गैस संकट हल होगा, दुकानदार कीमतें कम नहीं करेंगे। स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि एलपीजी संकट का असर केवल व्यवसायियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता की दैनिक जीवनशैली पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

पटना में एलपीजी गैस संकट ने खाद्य बाजार को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। बढ़ती गैस कीमतों और कम उपलब्धता के कारण थाली, स्नैक्स और बेकरी उत्पाद महंगे हो गए हैं। होटल, ढाबा और मिठाई दुकानदार अपने मेन्यू में कटौती करने को मजबूर हैं। आम जनता महंगी कीमतों के चलते रोजमर्रा का खाना पहले जैसी आसानी से नहीं खरीद पा रही है। इस संकट के चलते खाद्य व्यापारियों की रोजी-रोटी और उपभोक्ताओं की जेब दोनों प्रभावित हैं।
पटना में एलपीजी संकट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के कारण गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे स्थानीय खाद्य बाजार और आम आदमी के दैनिक जीवन पर पड़ता है। ऐसे समय में व्यवसायियों को उत्पादन लागत और गैस की उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

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